राज्यसभा ने नागरिकता संशोधन विधेयक को पारित कर दिया है. विधेयक के पक्ष में 125 मत पड़े, जबकि प्रस्ताव के विरोध में 105 सदस्यों ने मतदान किया.
इससे पहले, राज्यसभा ने नागरिकता संशोधन बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजने का प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया. बिल के समर्थन में 99 वोट पड़े, जबकि सेलेक्ट कमेटी में भेजने के ख़िलाफ़ 124 सदस्यों ने मतदान किया.
बिल में संशोधन के लिए कई प्रस्ताव लाए गए, जिनमें से अधिकांश ध्वनिमत से ख़ारिज हो गए. तृणमूल कांग्रेस के सदस्य डेरेक ओ ब्रायन के संशोधन प्रस्ताव पर भी मत विभाजन हुआ. उनके प्रस्ताव के पक्ष में 98 और विरोध में 124 मत पड़े.
इस तरह नागरिकता संशोधन विधेयक को दोनों सदनों की मंज़ूरी मिल गई है.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बयान जारी कर इसे संवैधानिक इतिहास का काला दिन बताया है. उन्होंने इसे भारत की अनेकता पर संकीर्ण मानसिकता और कट्टर ताक़तों की जीत बताया.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बंटवारे के बाद पैदा हुए हालात के कारण ये विधेयक लाना पड़ा. भारत ने वादा निभाया, लेकिन उसके तीन पड़ोसियों ने वादा नहीं निभाया.
उन्होंने कहा कि नेहरू-लियाक़त अली समझौते को पड़ोसी देशों ने नहीं माना.
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि 'जिसने जख्म दिए हैं, वही जख्म के बारे में पूछ रहे हैं.'
उन्होंने कहा कि छह धर्म के लोगों को बिल में लाया गया है, लेकिन मुसलमानों को शामिल नहीं करने पर सवाल पूछे जा रहे हैं. गृह मंत्री ने कहा कि वो बताना चाहेंगे कि मुसलमानों को इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया.
उन्होंने कहा कि मुसलमानों के आने से ही क्या धर्मनिरपेक्षता साबित होगी.
शाह ने कहा, "हम अपने विवेक से क़ानून ला रहे हैं और मुझे यकीन है कि अदालत में भी ये सही साबित होगा."
गृह मंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यकों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, किसी की भी नागरिकता छीनी नहीं जाएगी और धार्मिक रूप से प्रताड़ित लोगों को नागरिकता दी जाएगी.
इससे पहले, वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक के ज़रिये संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि गृह मंत्री अमित शाह ने इतिहास कहाँ से पढ़ा है, 'टू नेशन थ्योरी' कांग्रेस की नहीं थी.
सिब्बल ने आरोप लगाया कि 2014 से बीजेपी एक ख़ास मकसद को लेकर काम कर रही है. कभी लव जिहाद, कभी एनआरसी और कभी नागरिकता संशोधन.
कपिल सिब्बल ने कहा कि गृह मंत्री ने कहा कि मुसलमानों को डरने की ज़रूरत नहीं है.
सिब्बल ने कहा, " हिंदुस्तान का कोई मुसलमान आपसे डरता नहीं है. न मैं डरता हूँ, न इस देश के नागरिक डरते हैं."
उन्होंने कहा, "अगर हम डरते हैं तो संविधान से डरते हैं, जिसकी आप धज्जियां उड़ा रहे हैं"
इससे पहले, पी चिदंबरम ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर सरकार से सवाल पूछे और कहा कि सरकार के किसी जिम्मेदार व्यक्ति को इनका जवाब देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ये विधेयक संसद के मुंह पर तमाचा है और संसद से असंवैधानिक कदम उठाने को कहा जा रहा है.
चिदंबरम ने कहा कि सरकार के किसी ज़िम्मेदार व्यक्ति को इन सवालों के जवाब देने चाहिए, फिर चाहे को देश के अटॉर्नी जनरल हों या फिर दूसरे अधिकारी.
बिल पेश करते हुए उन्होंने राज्यसभा में कहा, "भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में इस बात की घोषणा की थी. हमने इसे देश की जनता के सामने रखा और हमें जनसमर्थन और जनादेश मिला. हमने लिखा था कि पड़ोसी देशों से प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए सिटिजनशिप संशोधन बिल को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. साथ ही हमने यह भी कहा था कि पूर्वोत्तर राज्यों में उन वर्गों के लिए सभी मुद्दों को स्पष्ट करने का प्रयास करेंगे जिन्होंने क़ानून के बारे में आशंका व्यक्त की है और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक रक्षा के लिए हम अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं."
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान, जिन तीन देशों की सीमाएं भारत को छूती हैं, यहां के हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई और पारसी लोग जो भारत में आए हैं, किसी भी समय आए हैं, उनको नागरिकता प्राप्त करने का इस बिल में प्रावधान है."
अमित शाह ने कहा कि देश के मुसलमानों को चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं. उन्होंने कहा, "भारतीय मुस्लिम सुरक्षित हैं और हमेशा सुरक्षित रहेंगे."
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