ट्विटर पर आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल का बायो पढ़िए:
"सब इंसान बराबर हैं, चाहे वो किसी धर्म या जाति के हों. हमें ऐसा भारत बनाना है जहाँ सभी धर्म और जाति के लोगों में भाईचारा और मोहब्बत हो, न कि नफ़रत और बैर हो"
देश में इन दिनों दिल्ली से लेकर केरल तक, हर जगह नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ़ और समर्थन में प्रदर्शन चल रहा है.
लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री इन प्रदर्शनों में अभी तक कहीं दिखाई नहीं दे रहे.
अब जऱा पुरानी तारीखों को याद कीजिए.
जून की गर्मी में दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल.
साथ में थे उनके दो मंत्री मनीष सिसोदिया और सतेंद्र जैन.
उप-राज्यपाल ने मिलने का वक़्त नहीं दिया तो केजरीवाल उनके ऑफ़िस में ही धरने पर बैठ गए.
उनकी मांग थी कि दिल्ली सरकार के आईएएस अधिकारी अपनी हड़ताल वापस लें.
मई, 2018
ऊपर लिखे वाक्ये से ठीक एक महीना पहले ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने विधायकों के साथ उप-राज्यपाल के यहां धरना दे चुके थे.
तब उनकी मांग थी- उप-राज्यपाल, राज्य सरकार की सीसीटीवी परियोजना को रोकने का काम न करे. हालांकि तीन घंटे में ही उनका ये धरना ख़त्म हो गया.
दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी. 26 जनवरी के लिए तैयारियां चल रही थी. रेल भवन के बाहर बने लॉन में दिल्ली के मुख्यमंत्री केन्द्र सरकार के ख़िलाफ़ धरने पर बैठे थे.
तब उनकी मांग थी पांच पुलिस वालों के तबादले की.
एक छापे के दौरान दिल्ली के क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती और पुलिस के बीच विवाद के बाद पुलिस और दिल्ली सरकार के बीच तनातनी की स्थिति पैदा हो गई थी.
चुनावी राजनीति में कदम रखने के पहले और बाद में हमेशा से केजरीवाल की छवि 'धरना कुमार' की रही.
लेकिन पिछले एक महीने से दिल्ली में सीएए को लेकर दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन चल रहे हैं. आम आदमी पार्टी सीएए का खुल कर विरोध भी कर रही है. लेकिन केजरीवाल वहां अब तक नहीं गए हैं. इतना ही नहीं, न वो जेएनयू गए और न ही जामिया. हां, जेएनयू हिंसा को लेकर उन्होंने 5 जनवरी को एक ट्वीट ज़रूर किया था.
नागरिकता संशोधन क़ानून पर आम आदमी पार्टी का स्टैंड साफ़ है. वो इस क़ानून के ख़िलाफ़ हैं.
18 दिसंबर को एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने क़ानून को लेकर केन्द्र सरकार से कई सवाल पूछे.
उन्होंने कहा, "बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में तीन करोड़ से चार करोड़ गैर-मुस्लिम लोग रहते हैं. इनमें से आधे भी हमारे देश में आ गए तो इनको नौकरी कौन देगा? इनको घर कहां से दोगे. कहां बसाओगे?"
दिल्ली विधानसभा के लिए 8 फ़रवरी को मतदान होने हैं. अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट से एक बार फिर से क़िस्मत आज़मा रहे हैं.
ऐसे में सवाल उठता है कि देश के हर मुद्दे पर मुखर राय रखने वाले अरविंद केजरीवाल का सीएए के विरोध प्रदर्शनों से गायब रहना क्या उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा है या फिर वाकई में केजरीवाल दिल्ली पर ही केवल फ़ोकस करना चाहते हैं?
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी मानते हैं कि ये आप पार्टी की सोची समझी नीति का हिस्सा है.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "एक साल पहले तक वो ममता बनर्जी हों या नीतीश कुमार, दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जब जब केन्द्र-राज्य के संबंधों पर अपना पक्ष रखा, केजरीवाल ने उनका साथ दिया. कई ग़ैर-बीजेपी वाली राज्य सरकारों के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से उन्होंने अपनी रणनीति को थोड़ा बदल दिया है. वे राष्ट्रीय मसलों से ख़ुद को अलग रखना चाहते हैं. और सिर्फ़ दिल्ली की राजनीति करना चाहते हैं."
2012 में केजरीवाल ख़ुद को युवाओं की आवाज़ बताते थे. उनकी पार्टी ने सबसे अधिक युवा और अनुभवहीन चेहरों को टिकट भी दिया था.
ऐसे में जिस सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हो रहा हो, वहां से दूरी बनाने की रणनीति कितनी सही है?
इस सवाल के जवाब में प्रमोद जोशी कहते हैं, "शाहीन बाग़ के प्रदर्शन को एक बड़ा तबक़ा मुसलमानों का प्रदर्शन मानता है. मुसलमान केजरीवाल की पार्टी का एक बड़ा वोट बैंक ज़रूर है. उनको अपने साथ रखने के लिए केजरीवाल ने अपने पार्टी के दूसरे विधायक अमानतउल्ला को लगा रखा है."
"लेकिन केजरीवाल को लगता है कि अगर खुलकर सपोर्ट में गए, तो वोटों का ध्रुवीकरण होगा. उनका दूसरा बड़ा वोट बैंक हिंदू वोट बैंक, नाराज़ न हो जाए. चुनाव के इतने क़रीब वो ये जोख़िम मोल नहीं ले सकते. उनको जीत के लिए दोनों का वोट चाहिए."
लेकिन आप आदमी पार्टी के दिल्ली के सांसद संजय सिंह इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते.
उनका कहना है, "इन चुनावों में सीएए, एनआरसी कोई मुद्दा नहीं है. असली मुद्दा है बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा. हमारी सरकार उन्हीं मुद्दों पर काम कर भी कर रही है. रही बात सीएए का विरोध किया तो संसद के दोनों सदनों में जो कुछ हमें बोलना था वहां हमने कहा. केवल राज्य सभा में नहीं लोकसभा में भी हमारी पार्टी ने स्टैंड साफ़ कर दिया है."
Wednesday, January 22, 2020
Thursday, January 9, 2020
जेएनयू हमला: लेफ़्ट और राइट दोनों हैं हिंसा के ज़िम्मेदार?
पाँच जनवरी को कुछ नकाबपोशों ने जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष पर हमला किया और विश्वविद्यालय के साबरमती होस्टल में घुसकर तोड़फोड़ की थी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
आइशी और लेफ्ट संगठनों ने दावा किया कि ये नकाबपोश बीजेपी के स्टूडेंट विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन वीडियो और तस्वीरों के ज़रिए ऐसा ही दावा यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एबीवीपी के छात्रों ने भी किया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उनके मुताबिक़ कुछ नकाबपोश उन पर भी हमला करने के लिए पेरियार होस्टल आए थे, जिनका नेतृत्व ख़ुद आइशी घोष कर रही थीं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी ने एक और वीडियो जारी किया है, जिसमें एक लड़का तेज़ी से भाग रहा है और उसके पीछे कई लोग भागते हुए आ रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी का दावा है कि बचकर भागता हुआ लड़का, जेएनयू छात्र और एबीवीपी कार्यकर्ता शिवम चौरसिया है और लेफ्ट संगठनों से जुड़े छात्र उसका पीछा कर रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसी वीडियो के बाद एबीवीपी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर स्कूल ऑफ सोशल साइंस से पीएचडी कर रहे शिवम चौरसिया की कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं. जिसमें उनके शरीर पर कुछ चोटें नज़र आ रही हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी का दावा है कि वामपंथी छात्रों के हिंसक हमले में शिवम को सर पर और गर्दन पर गंभीर चोटें आई हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
ये पूरी घटना क्या थी, जानने के लिए बीबीसी ने एबीवीपी के घायल छात्रों और आइशी घोष दोनों पक्षों से बात की.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी से जुड़े छात्र शिवम चौरसिया ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ये घटना पांच जनवरी की ही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उनके मुताबिक, "एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही थी. लंच के बाद हम लोग वहां खड़े थे. वहां कुछ लोगों ने हमसे कहा कि उन्हें रेजिस्ट्रेशन प्रोसेस में दिक्कत हो रही है, तो हम (शिवम और उनके साथी छात्र) उनकी मदद कर रहे थे. वो जगह सेफ ज़ोन हैं, क्योंकि 100 मीटर के दायरे में बिना इजाज़त वहां कोई प्रदर्शन नहीं हो सकता."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"उसी वक्त एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक के दोनों तरफ से एक भीड़ आती है. ये साढ़े तीन-चार बजे का वक्त था. अचानक आती भीड़ को देखकर हमें लगा कि कोई गड़बड़ है. खतरा महसूस होने पर हम लोग वहां से भागे."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"भागते हुए वो वीडियो बनाया गया. जो लोग पीछे आ रहे हैं, उनमें से कुछ लोग यहां के वामपंथी हैं और कुछ का चेहरा नहीं दिख रहा है, कुछ ऐसे भी हैं जो यहां के नहीं लग रहे हैं."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"मैं पेरियार हॉस्टल के पास आकर छिप गया. वो भीड़ भी यहां आ गई और बहुत हंगामा हुआ. जब मुझे लगा कि सबकुछ सामान्य हो गया है तो मैं बाहर निकला और हॉस्टल के बाहर वाली जूस की दुकान पर गया."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"मैं कुछ ऑर्डर कर ही रहा था कि देखा कि वही भीड़ फिर से आ रही है. खतरे को देखकर मैं ढाबे में छिपने लगा. उन्होंने मुझे देख लिया और वामपंथी संगठन आइसा और एसएफआई के दो-तीन कार्यकर्ताओं ने मुझे खींचा. मेरी शर्ट फट गई थी. मुझे बाहर ले आए और मुझे लाठी-डंडों से मारना शुरू कर दिया. मेरा सर फट गया, जिसमें पांच टांके आए हैं. गर्दन पर भी काफी चोट आई है. मेरा खून निकलने लगा और मैं गिर गया, वो लोग मुझे तब भी मारते रहे. वहां खड़े कुछ चश्मदीदों ने मेरी मदद की और मैं वहां से भागा. मैं पेरियार हॉस्टल में चला गया, लेकिन इन लोगों ने हॉस्टल में घुस कर भी मारना शुरू कर दिया. ये घटना साढ़े चार से पांच बजे के बीच हुई."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"वहां से भी भागकर मैं पास के किसी रूम में जाकर छिप गया. लगभग एक घंटा छिपा रहा. ये लोग एक-एक कमरे में जाकर छात्रों को बाहर निकलवा रहे थे."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"फिर एक घंटे बाद पुलिस आई, पुलिस भी ठीक तरह से सहयोग नहीं कर रही थी. उसके बाद कुछ लोगों ने एम्बुलेंस बुलाई और छह बजे तक हम सब लोग एम्स अस्पताल चले गए."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
पांच तारीख को सुबह से ही हमने रेजिस्ट्रेशन बायकॉट करने की अपील की हुई थी. जेएनयूएसयू के हम सभी ऑफिस बियरर स्कूल में थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
दोपहर के वक्त कुछ छात्र हमारे पास दौड़ते हुए आए और बताया कि एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक पर खड़े कुछ एबीवीपी और कुछ अनजान लोगों ने एक-दो छात्रों का फोन छीन लिया, एक मुस्लिम छात्र को निशाना बनाया, कई छात्रों को परेशान किया जा रहा है और एक को थपड़ मारा गया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी ने आपसे बातचीत में ये बात मानी है कि वो एडमिन ब्लॉक में थे. एडमिन ब्लॉक में रेजिस्ट्रेशन हो ही नहीं रहा था. वो कहीं और हो रहा था. वो झूठ बोल रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कुछ छात्रों ने हमें आकर कहा कि यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि के तौर पर आप कुछ क्यों नहीं करते. उसी वक्त मैंने पुलिस को इस सब की जानकारी दी और हस्तक्षेप की मांग की.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
3.45 बजे मैंने खुद पुलिस से बात की. तब मुझे भरोसा दिलाया गया कि कैंपस में सब ठीक है और वो लोग चले गए हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उस दिन जेएनयू स्टूडेंट यूनियन ने एक सॉलिडेरटी मार्च बुलाया हुआ था. टीचर्स एसोसिएशन ने पहले ही प्रोटेस्ट के लिए इकट्ठा होने का कॉल दिया हुआ था. हम लोग वहीं जा रहे थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उस वक्त मैं काफी पीछे थी. अचानक भाग-दौड़ मची और मुझे पता चला की आगे भाग-दौड़ मच गई है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
मैं दौड़कर वहां पहुंची. मुझे छात्रों ने बताया कि एबीवीपी ने पत्थरबाज़ी की है और उसमें दो छात्र घायल हो गए हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
तब मैंने छात्रों से बात की और उन्हें कहा कि यहां से हटना है और इन सब चीज़ों में नहीं पड़ना है. मैंने छात्रों को डांटा भी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
मैं एक यूनियन रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर वहां हालात देखने गई थी. उस वक्त मेरे साथ जो छात्र थे, उन्हें मैंने कहा कि यहां से चलो. मैं सिक्यूरिटी पर भी चिल्लाई कि इस सब को रोका जाए.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके बाद मैं टीचर एसोसिएशन के साथ साबरमती प्वाइंट पर गई. वहां सॉलडिरटी दिखाई. हमने वहां भी यही बात रखी कि वाइस चांसलर यही चाहते हैं कि कैंपस के अंदर ये सब हो ताकि फीस बढ़ोतरी के खिलाफ 70 दिन से हो रहे आंदोलन से ध्यान हटकर जेएनयू पर आ जाए और ये जेएनयू को बदनाम करने की कोशिश है. जैसा पहले भी हो चुका है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हमें इसी चीज़ का डर था और इसके डेढ घंटे बाद करीब पोने सात बजे कुछ छात्र फिर से दौड़ने लगे. उस वक्त भी मैंने अपने साथ के छात्रों को डांटा भी. कुछ नकाबपोश भी वहां आ गए. उन्होंने ही मुझ पर हमला किया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इससे एक दिन पहले भी यानी चार तारीख की दोपहर को कैंपस में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने हमारे कार्यकर्ताओं को पीटा था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हमारी यूनियन की जनरल सेकेट्री को भी पीटा गया था. काउंसलर अपेक्षा प्रियदर्शिनी का हाथ टूट गया. कितने तोड़ा? शिवम चौरसिया और मनीष जांगिड ने.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
वहीं एबीवीपी का कहना है कि उन्होंने किसी पर कोई हमला नहीं किया. उनका आरोप है कि हमला करने वाले आइसा, एसएफआई, बापसा से जुड़े लेफ्ट पार्टियों से जुड़े छात्र थे, जिन्होंने पहले उनपर हमला किया और बाद में आपस में ही भीड़ गए और आपस में ही मारपीट करने लगे. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
आइशी और लेफ्ट संगठनों ने दावा किया कि ये नकाबपोश बीजेपी के स्टूडेंट विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन वीडियो और तस्वीरों के ज़रिए ऐसा ही दावा यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एबीवीपी के छात्रों ने भी किया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उनके मुताबिक़ कुछ नकाबपोश उन पर भी हमला करने के लिए पेरियार होस्टल आए थे, जिनका नेतृत्व ख़ुद आइशी घोष कर रही थीं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी ने एक और वीडियो जारी किया है, जिसमें एक लड़का तेज़ी से भाग रहा है और उसके पीछे कई लोग भागते हुए आ रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी का दावा है कि बचकर भागता हुआ लड़का, जेएनयू छात्र और एबीवीपी कार्यकर्ता शिवम चौरसिया है और लेफ्ट संगठनों से जुड़े छात्र उसका पीछा कर रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसी वीडियो के बाद एबीवीपी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर स्कूल ऑफ सोशल साइंस से पीएचडी कर रहे शिवम चौरसिया की कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं. जिसमें उनके शरीर पर कुछ चोटें नज़र आ रही हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी का दावा है कि वामपंथी छात्रों के हिंसक हमले में शिवम को सर पर और गर्दन पर गंभीर चोटें आई हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
ये पूरी घटना क्या थी, जानने के लिए बीबीसी ने एबीवीपी के घायल छात्रों और आइशी घोष दोनों पक्षों से बात की.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी से जुड़े छात्र शिवम चौरसिया ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ये घटना पांच जनवरी की ही है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उनके मुताबिक, "एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही थी. लंच के बाद हम लोग वहां खड़े थे. वहां कुछ लोगों ने हमसे कहा कि उन्हें रेजिस्ट्रेशन प्रोसेस में दिक्कत हो रही है, तो हम (शिवम और उनके साथी छात्र) उनकी मदद कर रहे थे. वो जगह सेफ ज़ोन हैं, क्योंकि 100 मीटर के दायरे में बिना इजाज़त वहां कोई प्रदर्शन नहीं हो सकता."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"उसी वक्त एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक के दोनों तरफ से एक भीड़ आती है. ये साढ़े तीन-चार बजे का वक्त था. अचानक आती भीड़ को देखकर हमें लगा कि कोई गड़बड़ है. खतरा महसूस होने पर हम लोग वहां से भागे."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"भागते हुए वो वीडियो बनाया गया. जो लोग पीछे आ रहे हैं, उनमें से कुछ लोग यहां के वामपंथी हैं और कुछ का चेहरा नहीं दिख रहा है, कुछ ऐसे भी हैं जो यहां के नहीं लग रहे हैं."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"मैं पेरियार हॉस्टल के पास आकर छिप गया. वो भीड़ भी यहां आ गई और बहुत हंगामा हुआ. जब मुझे लगा कि सबकुछ सामान्य हो गया है तो मैं बाहर निकला और हॉस्टल के बाहर वाली जूस की दुकान पर गया."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
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"वहां से भी भागकर मैं पास के किसी रूम में जाकर छिप गया. लगभग एक घंटा छिपा रहा. ये लोग एक-एक कमरे में जाकर छात्रों को बाहर निकलवा रहे थे."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"फिर एक घंटे बाद पुलिस आई, पुलिस भी ठीक तरह से सहयोग नहीं कर रही थी. उसके बाद कुछ लोगों ने एम्बुलेंस बुलाई और छह बजे तक हम सब लोग एम्स अस्पताल चले गए."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
पांच तारीख को सुबह से ही हमने रेजिस्ट्रेशन बायकॉट करने की अपील की हुई थी. जेएनयूएसयू के हम सभी ऑफिस बियरर स्कूल में थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
दोपहर के वक्त कुछ छात्र हमारे पास दौड़ते हुए आए और बताया कि एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक पर खड़े कुछ एबीवीपी और कुछ अनजान लोगों ने एक-दो छात्रों का फोन छीन लिया, एक मुस्लिम छात्र को निशाना बनाया, कई छात्रों को परेशान किया जा रहा है और एक को थपड़ मारा गया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एबीवीपी ने आपसे बातचीत में ये बात मानी है कि वो एडमिन ब्लॉक में थे. एडमिन ब्लॉक में रेजिस्ट्रेशन हो ही नहीं रहा था. वो कहीं और हो रहा था. वो झूठ बोल रहे हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कुछ छात्रों ने हमें आकर कहा कि यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि के तौर पर आप कुछ क्यों नहीं करते. उसी वक्त मैंने पुलिस को इस सब की जानकारी दी और हस्तक्षेप की मांग की.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
3.45 बजे मैंने खुद पुलिस से बात की. तब मुझे भरोसा दिलाया गया कि कैंपस में सब ठीक है और वो लोग चले गए हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उस दिन जेएनयू स्टूडेंट यूनियन ने एक सॉलिडेरटी मार्च बुलाया हुआ था. टीचर्स एसोसिएशन ने पहले ही प्रोटेस्ट के लिए इकट्ठा होने का कॉल दिया हुआ था. हम लोग वहीं जा रहे थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उस वक्त मैं काफी पीछे थी. अचानक भाग-दौड़ मची और मुझे पता चला की आगे भाग-दौड़ मच गई है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
मैं दौड़कर वहां पहुंची. मुझे छात्रों ने बताया कि एबीवीपी ने पत्थरबाज़ी की है और उसमें दो छात्र घायल हो गए हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
तब मैंने छात्रों से बात की और उन्हें कहा कि यहां से हटना है और इन सब चीज़ों में नहीं पड़ना है. मैंने छात्रों को डांटा भी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
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इसके बाद मैं टीचर एसोसिएशन के साथ साबरमती प्वाइंट पर गई. वहां सॉलडिरटी दिखाई. हमने वहां भी यही बात रखी कि वाइस चांसलर यही चाहते हैं कि कैंपस के अंदर ये सब हो ताकि फीस बढ़ोतरी के खिलाफ 70 दिन से हो रहे आंदोलन से ध्यान हटकर जेएनयू पर आ जाए और ये जेएनयू को बदनाम करने की कोशिश है. जैसा पहले भी हो चुका है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हमें इसी चीज़ का डर था और इसके डेढ घंटे बाद करीब पोने सात बजे कुछ छात्र फिर से दौड़ने लगे. उस वक्त भी मैंने अपने साथ के छात्रों को डांटा भी. कुछ नकाबपोश भी वहां आ गए. उन्होंने ही मुझ पर हमला किया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इससे एक दिन पहले भी यानी चार तारीख की दोपहर को कैंपस में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने हमारे कार्यकर्ताओं को पीटा था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हमारी यूनियन की जनरल सेकेट्री को भी पीटा गया था. काउंसलर अपेक्षा प्रियदर्शिनी का हाथ टूट गया. कितने तोड़ा? शिवम चौरसिया और मनीष जांगिड ने.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
वहीं एबीवीपी का कहना है कि उन्होंने किसी पर कोई हमला नहीं किया. उनका आरोप है कि हमला करने वाले आइसा, एसएफआई, बापसा से जुड़े लेफ्ट पार्टियों से जुड़े छात्र थे, जिन्होंने पहले उनपर हमला किया और बाद में आपस में ही भीड़ गए और आपस में ही मारपीट करने लगे. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
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